Sunday, 31 July 2016

हम बोलेगा तो बोलोगे कि बोलता है-2
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''भाईसा'ब, जय जिनेन्द्र।"
'जय जिनेन्दर सा जय जिनेन्दर।'

"और भाईसा'ब, क्या चल रहा है आजकल ?"
'बस मजे है जी।'

"बहुत बढ़िया भाईसा'ब। क्या सटर डे-सन्डे को आप:-
"हॉटल में खाना खाने जाते हैं ?"
'हाँ।'

"सिनेमा देखने भी जाते हैं ?"
'हाँ-हाँ ।'

"दोस्तों के साथ गपशप करने भी जाते ही होंगे ?"
'हाँ हाँ बिलकुल ।'

"अच्छा पिकनिक-सैरसपाटे पर भी जाते हैं ना ?"
'जी हाँ।'

"भाभी जी किटी पार्टी में भी जाती है ना ?"
'हाँ-हाँ जाती हैं ।'

"बच्चे डांस क्लास में भी जाते ही होंगे  ?"
'हाँ हाँ।'

"वीकेंड पर रिसोर्ट में भी जाना होता ही होगा ?"
'हाँजी,बिलकुल होता है ।'

"और शॉपिंग के लिए मॉल में भी जाते हैं ना ?"
'बिलकुल जी जाते ही हैं ।'

"बच्चे को क्रिकेटर बनाने के लिए मैदान में लेजाते हैं ?"
'हाँ हाँ।'

"अच्छा भाईसा'ब, आप कौन है ?"
'क्या मजाक कर रहे हैं !अजी सा'ब मैं जैन हूँ जैन !'

"अच्छा ! बहुत बढ़िया। सप्ताह में एकाध दिन आप अपने बच्चों को किसी जैन मंदिर में सेवा-पूजा करने ले जाते हैं ?"
'ऊं..ऊं...'

"क्या उन्हें जैन धर्म के सिद्धांतों और तीर्थंकरों के बारे में थोड़ा-थोड़ा समझाते हैं ?"
''ऊं..ऊं...ऊं......'

"क्या हुआ भाईसा'ब.......? बगले क्यूं झाँक रहे हो ?? मैंने कोई गलत सवाल पूछ लिया क्या ???
मिच्छामि दुक्कड़म जी !!!"

बस अब और नहीं बोलूंगा ! और बोलूंगा तो बोलोगे के बोलता है !
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लेखक- अशोक पुनमिया
लेखक-कवि-पत्रकार 
सम्पादक-'मारवाड़ मीडिया'


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