Monday, 7 November 2016

हम बोलेगा तो बोलोगे कि बोलता है-15
-------------------------------------------

'हल्दी' की 'जल्दी' में गुम ना हो इंसानियत के सरोकार !

----------------
सर्दी ने दस्तक देदी है.
   सुबह-शाम पड रही गुलाबी ठंडक अच्छा अहसास दे रही है.
  दोस्त लोग हल्दी की गोठ की चर्चा करने लगे हैं.इसमें कोई बुराई भी नहीं.गोठ करना अपनी परम्परा है और संस्कृति भी है.मिलबैठ कर साथ-साथ खाने से अच्छी बात भला और हो भी क्या सकती है !
  लेकिन दोस्तों,हमें सर्दी में हल्दी की गोठ करने के साथ-साथ अपने सामाजिक सरोकारों को भी ध्यान में रखना ही चाहिए.यक़ीनन अगर हम ऐसा करेंगे तो हमारी इस हल्दी पार्टी का मजा ज़रूर दुगुना हो जाएगा.
  इस ठण्ड के मौसम में मैं बात कर रहा हूँ अपने ही उन बंधुओं की जो स्वेटर-कम्बल के अभाव में ठिठुरेंगे!
  हल्दी की गोठ करते हुए अगर हम अपने ही कुछ अभावग्रस्त बंधुओं को ठिठुरता देखेंगे तो क्या वो हल्दी हमारे गले उतर पाएगी ?एक तरफ हमारे अपने ही कुछ अभावग्रस्त बच्चे,बूढ़े,स्त्री-पुरुष ठण्ड में ठिठुरते रहे,फटे कपड़ों में सर्दी का कहर झेलते रहे,और हम अगर उनसे आँखें फेर कर हल्दी की चकाचक गोठें उड़ाते रहें,तो दोस्तों फिर हमें अपना आत्मावलोकन करना होगा,अपनी इंसानियत को टटोलना पडेगा!
  आईये दोस्तों,इस सर्दी के मौसम में हम संकल्प करें कि हमारे गोठ समूह हल्दी पार्टी करने से पहले अपने सामर्थ्यानुसार 2 - 4 - 6 - 8....स्वेटर, कम्बल, चप्पल, मोज़े जैसी वस्तुओं को, अपने आसपास के जरुरतमंद लोगों में वितरित करेंगे,उन्हें ठण्ड से बचायेंगे,अपने सामाजिक सरोकारों को पूरा करेंगे तथा बेबस-लाचार-मज़बूर चेहरों पर भी थोड़ी मुस्कराहट,थोड़ी गर्माहट लायेंगे और फिर ही हम हल्दी को गोठ करेंगे.
  इसमें मारवाड़ मीडिया भी आपके साथ है.अपने ही कुछ अभावग्रस्त बंधुओं को प्रकृति की मार से बचाने के इस सुकृत में जो भी बंधू अथवा समूह शामिल होगा,उनके इस सुकृत का मारवाड़ मीडिया के आगामी अंकों में फोटो सहित विवरण दिया जाएगा,ताकि समाज के अन्य लोगों में अपने अभावग्रस्त बंधुओं के प्रति जागृति फैले और अधिक से अधिक लोग अपने सामाजिक सरोकारों के प्रति आगे आ सके.
  मित्रों,ये ईश्वर की कृपा है कि हमें मानव जीवन मिला है.तो आईये अपनी मानवता को ज़िंदा रखें,ज़िंदा करें, ताकि प्रकृति के प्रकोप से असमय मौत के मुंह में समाने को मजबूर इंसानों का जीवन बचाया जा सके.

  अगर आपको ये मेसेज काम का लगे,आपके दिल को छू जाए तो कृपया इसे आगे फोरवर्ड अवश्य करे.शायद किसी की इंसानियत जागृत हो जाए और सर्दी में ठण्ड से ठिठुरता कोई अभावग्रस्त बच्चा,बूढा,स्त्री-पुरुष सर्दी के कहर से बच सके.

    अपन ने जो सोचा-समझा,आपको बता दिया।अब आपको ठीक लगे तो आप भी इस पर विचार करें।मैं और ज्यादा कुछ बोलूंगा तो फिर आप ही बोलोगे कि बोलता है !

-----------------------------------------------------------------------------------------------
लेखक- अशोक पुनमिया
लेखक-कवि-पत्रकार-ब्लॉगर 
सम्पादक-'मारवाड़ मीडिया'
मेरे अन्य ब्लॉग-
http://readerblogs.navbharattimes.indiatimes.com/pate-ki-baat/

No comments:

Post a Comment